ईरान और इजरायल के बीच तेजी से बढ़ते तनाव ने 2026 में मिडिल ईस्ट के हवाई मार्गों को गंभीर संकट में डाल दिया है। ताज़ा स्थिति यह है कि युद्ध‑सदृश हालात और मिसाइल हमलों की आशंका के बीच कई देशों ने अपने एयरस्पेस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसका सीधा प्रभाव भारत से पश्चिम एशिया जाने वाली उड़ानों पर पड़ रहा है।
ईरान–इजरायल संघर्ष 2026 की शुरुआत कुछ हफ्तों पहले सीमा‑विवाद और सैन्य हमलों के आरोपों के साथ हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने एक‑दूसरे के खिलाफ हवाई और मिसाइल हमलों को लेकर जिस आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया है, उसने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इसी के चलते भारत सहित कई देशों की एयरलाइंस को मजबूरन अपनी उड़ानों पर तत्काल फैसले लेने पड़े हैं।
भारतीय एयरलाइंस ने उड़ानें क्यों रोकीं?
एयर ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान, इराक, इजरायल और खाड़ी के कुछ देशों के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्ग एशिया और यूरोप के बीच सबसे प्रमुख कॉरिडोर माने जाते हैं। लेकिन ईरान–इजरायल संघर्ष 2026 के बाद इन मार्गों पर हवाई सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। कई मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच आशंका जताई गई कि अगर किसी भी तरह का युद्धक उपकरण हवाई क्षेत्र में सक्रिय है तो यात्री विमानों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
यही वजह है कि Air India ने सबसे पहले अपनी कुछ मिडिल ईस्ट उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया। रिपोर्टों के मुताबिक एयरलाइन ने तेहरान, तेल अवीव, दोहा और कुछ अन्य गंतव्यों के लिए उड़ानें रोक दी हैं, जबकि दुबई और अबू धाबी की कुछ उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया जा रहा है।
IndiGo और Air India Express जैसी कंपनियों ने भी ईरान–इजरायल युद्ध के चलते अपने वेस्ट एशिया रूट पर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। कई उड़ानें या तो अस्थायी रूप से रद्द की गई हैं या उनकी उड़ान पट्टियाँ बदली गई हैं, ताकि विमान विवादित हवाई क्षेत्र से दूर रह सकें।
मिडिल ईस्ट एयरस्पेस की बंदी और वैकल्पिक रास्ते
ईरान–इजरायल संघर्ष के कारण कुछ देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कर दिया है, जबकि कई देशों ने ऊँचाई और मार्ग के संबंध में अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए हैं। इससे एशिया से यूरोप और अमेरिका के लिए जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों को भी वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं।
जब कोई विमान सामान्य मार्ग के बजाय लंबा घुमावदार रास्ता लेता है, तो उड़ान की अवधि और ईंधन की खपत दोनों बढ़ जाते हैं। इसका असर टिकट के किराए और शेड्यूल पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान–इजरायल संघर्ष 2026 लंबे समय तक चला, तो अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की लागत और समय, दोनों में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
फँसे हुए यात्रियों को वापस लाने की कोशिश
ईरान–इजरायल युद्ध से सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है जो पहले से मिडिल ईस्ट में मौजूद हैं या जिनकी वापसी उड़ानें इस संकट के बीच रद्द हो गईं। ऐसी स्थिति में भारतीय दूतावास और एयरलाइंस मिलकर stranded भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, Air India ने कुछ विशेष उड़ानें चलाकर दुबई, अबू धाबी और अन्य खाड़ी देशों में फँसे भारतीयों को भारत वापस लाने की योजना बनाई है। एक हालिया उदाहरण में दुबई से दिल्ली के लिए एक विशेष उड़ान के माध्यम से सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया, जिनकी नियमित उड़ानें ईरान–इजरायल संघर्ष के कारण रद्द हो चुकी थीं।
विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि मिडिल ईस्ट के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले या वहाँ यात्रा की योजना बना रहे भारतीय नागरिक स्थानीय भारतीय दूतावास की सलाह पर ही भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें।
यात्रियों के लिए नई सलाह और सावधानियाँ
ईरान–इजरायल संघर्ष 2026 की स्थिति को देखते हुए भारतीय एयरलाइंस और सरकार ने यात्रियों के लिए कुछ सामान्य सलाह जारी की हैं।
- जिन यात्रियों की निकट भविष्य में मिडिल ईस्ट की यात्रा तय है, वे अपनी एयरलाइन से लगातार संपर्क में रहें और उड़ान की स्थिति समय‑समय पर चेक करते रहें।
- टिकट रद्द होने या उड़ान में बदलाव की स्थिति में, अधिकांश एयरलाइंस rebooking और refund में अतिरिक्त लचीलापन दे रही हैं; यात्री ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप के माध्यम से विकल्प देख सकते हैं।
- जिन लोगों की यात्रा अत्यावश्यक न हो, उन्हें कुछ समय के लिए यात्रा स्थगित करने पर विचार करना चाहिए, विशेषकर उन देशों के लिए जो सीधे ईरान–इजरायल संघर्ष क्षेत्र के आसपास स्थित हैं।
- मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे भीड़‑भाड़ वाली संवेदनशील जगहों से बचें, स्थानीय कानूनों और कर्फ्यू नियमों का पालन करें और आपातकालीन स्थिति में दूतावास द्वारा दिए गए हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।
भारत की कूटनीतिक भूमिका और आगे की संभावनाएँ
भारतीय विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयानों में ईरान–इजरायल संघर्ष 2026 पर गहरी चिंता व्यक्त की है और दोनों पक्षों से संयम बरतने तथा संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की है। भारत की कोशिश है कि एक ओर वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में अपनी पारंपरिक नीति को जारी रखे, वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तनाव कम हो जाता है और मिडिल ईस्ट एयरस्पेस पर लगे प्रतिबंध धीरे‑धीरे हटने लगते हैं, तो भारतीय उड़ानें भी सामान्य परिचालन की ओर लौट सकती हैं। लेकिन जब तक ईरान–इजरायल युद्ध की स्थिति स्पष्ट रूप से शांत नहीं होती, तब तक यात्रियों और एयरलाइंस दोनों को सावधानी की नीति अपनानी होगी।
अभी के लिए इतना साफ है कि ईरान–इजरायल संघर्ष 2026 केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि उसने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन, वैश्विक व्यापार और लाखों आम यात्रियों की रोजमर्रा की ज़िंदगी को भी सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है।